देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सरकार का लक्ष्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित कर किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना है।
राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से खेती करने, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने तथा विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सरकार का मानना है कि लेमनग्रास, तुलसी, अश्वगंधा, स्टीविया और अन्य औषधीय फसलों की मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इसके साथ ही प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया तो उत्तराखंड सुगंधित और औषधीय पौधों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास को भी नई गति मिलेगी।
