देहरादून। हरीश रावत ने राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों को खारिज करते हुए साफ किया है कि फिलहाल उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर सक्रिय राजनीति में उतरने को तैयार हैं, लेकिन इससे पहले जनता और समर्थकों की राय जानेंगे।

रावत ने बताया कि 15 अप्रैल से वे उत्तराखंड के व्यापक दौरे पर निकलेंगे। इस दौरान वे 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में इंडियन नेशनल कांग्रेस की हार के कारणों पर जनता से संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि वह उत्तरकाशी के गंगोत्री राजमार्ग और धराली से अपने अभियान की शुरुआत करेंगे।

रावत ने 2022 की हार के लिए तथाकथित मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि यह मुद्दा वास्तविक नहीं था, लेकिन पार्टी के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे हवा दी, जिसे भारतीय जनता पार्टी ने भुनाया।

उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय उन्होंने चुनावी राजनीति से पीछे हटने का विचार किया था, लेकिन अब वे जनता की अदालत में जाकर सवालों के जवाब तलाशना चाहते हैं। रावत ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के लिए किए गए कार्यों के बावजूद उनकी हार एक बड़ा सवाल है।

2017 में हरिद्वार ग्रामीण सीट से मिली हार को उन्होंने सबसे अधिक पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र के लगभग हर परिवार को जानते थे और अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे, लेकिन परिस्थितियां अचानक बदल गईं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर टिप्पणी करते हुए रावत ने उन्हें बेहतरीन इंसान और शिष्ट राजनीतिज्ञ बताया, लेकिन उनके कामकाज से असंतोष जताया।

रावत ने ‘उत्तराखंडियत’ को भाजपा के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का जवाब बताते हुए कहा कि राज्य का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह दी कि वे केवल बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि जनता के बीच विचारधारा के रूप में सक्रिय हों।