हिमाचल प्रदेश के चौपाल से पांवटा साहिब आ रही हिमाचल रोडवेज की एक बस मंगलवार को हरिपुर-कोटी-क्वानू-मीनस राज्य राजमार्ग पर सुदोई खड्ड के पास करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा उस समय हुआ, जब बस कालसी की ओर से आ रहे एक ट्रक को पास दे रही थी। इसी दौरान सड़क किनारे बना पुश्ता ढह गया और बस अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई।
यह मार्ग व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला 72 किलोमीटर लंबा यह अंतरराज्यीय मोटर मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, करीब 30 किलोमीटर तक मार्ग डेढ़ लेन का है, जबकि आगे अधिकांश हिस्से में यह सिंगल लेन में सिमट जाता है।
मार्ग पर बने पुश्ते और रिटेनिंग वॉल्स भी जगह-जगह से टूटे हुए हैं। दुर्घटना की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील इस मार्ग पर क्रैश बैरियर की भारी कमी है, जिसके चलते हर वर्ष कई वाहन हादसे का शिकार होते हैं और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
जौनसार-बावर क्षेत्र के प्रवेश द्वार हरिपुर-कालसी से होकर गुजरने वाला यह मार्ग छिबरौ, कोटी और इच्छाड़ी जैसी प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं को जोड़ता है। साथ ही, त्यूणी-बाबर, शिमला और रोहड़ू जैसे सेब व फल उत्पादक क्षेत्रों से काश्तकार और बागवान इसी मार्ग से रातों-रात सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और दिल्ली की मंडियों तक पहुंचते हैं।
अफसोस की बात यह है कि हादसों के बाद ही शासन-प्रशासन हरकत में आता है, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि केवल संवेदना व्यक्त कर अपनी जिम्मेदारी निभा देते हैं। मार्ग के स्थायी समाधान, चौड़ीकरण और क्रैश बैरियर लगाने पर अब तक ठोस पहल नहीं हो पाई है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग साहिया डिवीजन की अधिशासी अभियंता रचना थपलियाल ने बताया कि जिन स्थानों पर क्रैश बैरियर नहीं हैं, वहां इनके लिए इस्टीमेट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजे जा रहे हैं। साथ ही, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।
