शंखनाद INDIA/ देहरादून

ये कोई आम बात नहीं है जब पहाड़ों में सरकार के नियमों को ताक पर रख अवैध तरीकों से निर्माण कार्यों को किया जाए| खनन हो, सड़क डामरीकरण हो या कोई भी अन्य कार्य यहां सभी कामों को लेकर सरकार के नियमों की धज्जियां उडाई जा रही है|

ताजा मामला पौड़ी के सतपुली का है जहां सरकार के नियमों की खूब धज्जियां उड़ाई जा रही हैं| यहां सिंचाई विभाग द्वारा सतपुली नयार नदी पर सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा रहा है| इस निर्माण कार्य में भी कार्यदायी संस्था और सिंचाई विभाग की मिलीभगत से सरकार को राजस्व का खूब चुना लगाया जा रहा है, हालांकि ये मामला प्रशासन के पास भी गया है लेकिन बावजूद निर्माण कार्य में सरकार को खूब चूना लगाया जा रहा है|

दरअसल, सिंचाई विभाग द्वारा सतपुली नयार नदीं पर सुरक्षा दीवार के नाम पर अवैध खनन व बिना परमिशन के पोकलैंड व जेसीबी जैसी मशीनों का काम जोरों पर चल रहा था| वहीं जब उपजिलाधिकारी को मामले की भनक लगी तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया  और तत्काल निर्माण कार्य को बंद करवा दिया| हालांकि कार्यदायी संस्था व सिंचाई विभाग पर कोई कार्यवाही नहीं की गई|

जब उपजिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया तो उन्हें पता चला कि लगभग डेढ़ महीने पहले से ये निर्माण कार्य चल रहा था लेकिन कार्यदायी संस्था के पास बड़ी मशीनें लगाने की परमिशन नहीं थी और ना ही 1 किलोमीटर के दायरे से पत्थर व बजरी लाने की अनुमति थी| बावजूद इसके यहां पोकलैंड जेसीबी जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा था| उपजिलाधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान खनन विभाग की तरफ से टैक्स के 5000 जमा न होने की बात कही गई|  और तीन दिन बाद एक बार फिर से बिना परमिशन के निर्माण कार्य शुरू कर दिया| इस पूरे मामले में अब सवाल यहा है कि आखिर किसकी शह पर कार्यदाई संस्था और सिंचाई विभाग मिलकर इस निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं| क्या सिंचाई विभाग व पावरफुल कार्यदायी संस्था किसी भी कार्य में अपनी मनमानी कर सकती है?

वही अब मामले पर उपजिलाधिकारी सतपुली की जांच रिपोर्ट आ गई है| रिपोर्ट में कार्यदायी संस्था के पास अभी भी जेसीबी पोकलैंड की कोई परमिशन नहीं है और अगर अब कार्यदायी संस्था मशीनों से काम करती है तो उस पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी|

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