रामनगर। वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल के प्राकृतिक वातावरण को मानवीय दखल से बचाने के उद्देश्य से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब पार्क के सभी पर्यटन जोनों में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों के लिए मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुपालन में लागू किया गया है।

पार्क प्रशासन के अनुसार सफारी के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग वन्यजीवों के स्वाभाविक व्यवहार को प्रभावित करता है। मोबाइल की रिंगटोन, फ्लैश लाइट, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल शोर से जानवर विचलित होते हैं, जिससे उनके प्राकृतिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए यह सख्त नियम लागू किया गया है।

नए नियमों के तहत डे-सफारी पर जाने वाले सभी पर्यटकों को प्रवेश द्वार पर ही अपने मोबाइल फोन जमा कराने होंगे। किसी भी तरह के नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। हालांकि पर्यटकों को डीएसएलआर और अन्य प्रोफेशनल स्टिल कैमरे ले जाने की अनुमति दी गई है, ताकि वे वन्यजीवों की तस्वीरें ले सकें।

नाइट स्टे पर जाने वाले पर्यटकों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। उनके मोबाइल फोन जिप्सी में रखे गए एक विशेष बॉक्स में सुरक्षित रखे जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिप्सी चालक और नेचर गाइड की होगी। रेस्ट हाउस पहुंचने के बाद मोबाइल फोन लौटा दिए जाएंगे, लेकिन उनका उपयोग केवल आवास परिसर के भीतर ही किया जा सकेगा। बाहर इस्तेमाल करते पकड़े जाने पर मोबाइल जब्त किए जा सकते हैं।

पार्क प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल पर्यटकों पर ही नहीं, बल्कि नेचर गाइड और जिप्सी चालकों पर भी समान रूप से लागू होगा। प्रशासन ने सभी से नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि वन्यजीव संरक्षण के प्रयास प्रभावी और सफल हो सकें।