शंखनाद INDIA/

विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या मंे तपोवन व रैणी गांव पहंुचे लापता व्यक्तियों के स्वजनों ने अब भी अपनों के मिलने की आस नहंी छोडी़ हैं। तबाही के चार दिन बाद भी उनकी निगाहें ऋषिगंगा व धौलीगंगा नदी के मलबे पर टिकी हुई हैं। स्वजन मलबे को धीमी गति से हटाए जाने से भी बैचेन है। वे कहते है कि प्रशासन अगर तेजी से मलबा हटाने का कार्य करता तो कई लापता व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती थी।
सात फरवरी को ऋषिगंगा व धौलीगंगा नदी में आए सैलाब के बाद लापता व्यक्यिों के स्वराज बड़ी तादाद में तपोवन व रैणी गांव पहुंच चुके है। हर पल उनकी टकटकी वहां हो रहे राहत व बचाव कार्यो पर लगी रहती है । जेसीबी से जैसे ही मलबा हटाया जाता है उनके मन मे उम्मीद की एक लौ जलती हैं और फिर वही निराशा , इसी आस के कई लोग तो रैणी व तपोवन में सड़क पर ही रात गुजार रहे है। हालंकि, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन पर समय बीतने के साथ निराश्
तपोवन और ऋषिगंगा प्रोजेक्ट पर टूटे कुदरत के कहर को अब 80 घण्टे से अधिक का समय बीत चुका है। देश के सात राज्यों के लोग हादसे के बाद से गायब हैं, दूर दराज से लोग अपनों की उम्मीद में यहाँ पहुंच रहे हैं। हर किसी की आंखों मे बस अपनों का इंतजार हैं ,लेकिन यह इंतजार खत्म होने का नाम नहंी ले रहा हैं।

अपनों की तलाश में आए लोग राहत एवं बचाव कार्य शुरू होते ही सुबह सुंरग के गेट के पास खडे़ हो जाते हैं । टकटकी लगाए जेसीबी के मलबे पर लोगों की नजर हैं लेकिन दिनभर इंतजार के बाद भी लोगों को मायूसी मिल रही है। पास में ही बनाए गए राहत शिवरों में ऐसे लोगों को ठहराया जा रहा है स्वयं सेवी संस्थाएं उन्हें खाना व अन्य मदद दे रही हैं लेकिन रातभर किसी की आँखों में नींद नहीं है। किमाणा गांव के भगत सिंह के दो भाई संुरग के अंदर फंसे हुए है। भगत सिंह दो दिन से अपने भाइयों की खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सहारनपुर के चाटवा गांव  के कुर्बान और वाजिद भी अपनों की तलाश में तपोवन पहुंचे है। कुर्बान के भाई नौमान और वाजिद के भाई सादिक सुरंग में फंसे हुए हैं। इस गांव के कुल पांच लोग आपदा में लापता हो गए थे। गांव से लगातार अपनों की खोज खबर के लिए फोन आ रहे हैं, लेकिन वे परिजनों को कुछ बता भी नहंीं पा रहे हैं।
यूपी मिर्जापुर के अजय कुमार के चाचा लापता चल रहे हैं। तीन दिन के सफर के बाद वे यहां पहुंचे हैं लेकिन उनके हाथ भी मायूसी लगी है। रैणी में ऋषिगंगा परियोजना में दबे लोगों के परिजनों का भी यही हाल है। रैणी गांव के समीप हिमस्खलन से मची तबाही मे जौनसार के नौ लोग लापता हैं। जिनका अब तक कोई पता नहीं है। जिनका अब तक कोई पता नहीं है। लापता युवकों के परिजन अपनों की तलाश में तपोवन में दर-दर भटक रहे है। लापता जगदीश तोमर की बूढ़ी मां अपने बेटे के लौट आने के इंतजार में बैठी है। चार दिन से बेटे का फोन न आने से मां बेटे की याद में बेचैन है।
साहिया निवासी बधो देवी के पति धूम सिंह का करीब पंद्रह वर्ष पहले निधन हो गया था। लेकिन बधो देवी ने हिम्मत नहीं हारी। दो बेटों का पालन पोषण कर आगे बढ़ाया । बधो देवी अपने छोटे बेटे जगदीश के पास रहती हैं। बधो देवी की बुढ़ापे की देखभाल जगदीश तोमर ही करते थे। गत रविवार को चमोली जिले के रैणी गांव के समीप हिमस्खलन से हुई तबाही में जौनसार के नौ युवक लापता हो गए । जिसमें बधो देवी का जगदीश तोमर भी शामिल है। बेटे के लापता होने की सूचना के बाद बधो देवी का चूल्हा अब तक नहंीं जला । वह कहती हैं कि बेटा रोज शाम को काम से लौटने के बाद उसे फोन करता था । रविवार की शाम से लेकर तब तक बेटे का फोन नहीं आया ।
आपदा के 72 घंटे बीज जाने के बाद भी जब अपनांे का कहीं कोई सुराग नहंीं मिला तो रैणी में अपनों की खोज में आये परिजनों ने जम कर बवाल काटा। अन्य प्रांतों से आये लोगों ने कहा कि दो दिन तो लगा कि पूरी सरकारी मशीनरी काम में जूट गई हैं, लेकिन बुधवार को नजरा ही बदल गया है । बीआरओ पुल बनाने में और पुलिस लोगों को यहां मत जाओ वहा मत जाओ कह कर रोकने में लग गई है। परिजनों ने कहा कि उनके गुमशुदा लोग कब तक मिलेगें प्रशासन एवं सरकार बताये। वहीं एसडीआरएफ की डाग स्क्वायड टीम ने तीन बार लापता लोगों को खोजने का प्रयास किया लेकिन चारों ओर दलदल होने के कारण उन्हें नाकामी ही मिली । बुधवार को कई बार पुलिस एवं परिजनों के बीच झपड़ हुई। पुलिस किसी तरह से लोेगों को शान्त करती नजर आयी ।

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