शंखनाद INDIA/अलमोड़ा-: 10 जनवरी सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डॉ भास्कर चौधरी को इंग्लैंड स्थित विश्व प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भारतीय शिक्षा व्यवस्था व नई शिक्षा नीति 2020 संबंधी शोध साक्षात्कार हेतु आमंत्रित किया गया। डॉ भास्कर को गत वर्षो में अध्यापक शिक्षा संबंधी आए आमूलचूल परिवर्तनों तथा आधुनिक आयामों व नई शिक्षा नीति के तहत भविष्य में आने वाले सकारात्मक परिवर्तनों के संदर्भ में साक्षात्कार हेतु शामिल किया गया।

डॉ चौधरी की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एन एस भंडारी द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की गई। इस उपलब्धि पर देश के अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों यथा दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, एमएसयू बडौदा, वर्धा विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, नागालैंड विश्वविद्यालय, तेजपुर विश्वविद्यालय समेत कई केंद्रीय व राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षा विभाग के प्राध्यापकों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।

उक्त साक्षात्कार में लंदन से साक्षात्कारकर्ता द्वारा डेढ़ घंटे से अधिक के ऑनलाइन साक्षात्कार में डॉ चौधरी से स्कूली एवं उच्च शिक्षा व्यवस्था एवं नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न आयामों के परिपेक्ष में विस्तार से कई प्रश्नों के माध्यम से चर्चा की गई। इसी संदर्भ में हिमालयी राज्य उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के संबध में भी वार्ता हुई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं नियामक संस्थाओं की बदलती भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त 21वीं सदी के अनुरूप भारत एवं अन्य देशों में प्रचलित शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव पर भी उन्होंने अपनी बात रखी।

डॉ चौधरी ने बताया की आने वाले समय में शिक्षा संकाय एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के अंतर्गत राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों, स्कूली शिक्षकों एवं अन्य विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों की भी भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर सृजित हो सकेगा, तथा नवसृजित विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा के आधुनिक आयामों का लाभ समाज को मिल सकेगा। ज्ञात हो कि डॉ भास्कर द्वारा विगत माह में कतर में व्याख्यान दिया गया था। उनके द्वारा पूर्व में कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं एवं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान भी दिए गए हैं।

सोबन सिंह जीना विवि और आयुर्वेद विवि आपसी साझेदारी से शिक्षा से जुड़ी अनेक गतिविधियों में मिलकर काम करेंगे। इसके लिए बाकायदा दोनों संस्थाओं ने बीते दिनों एक एमओयू हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू के बाद जहां यहां पढऩे वाले अनेक विषयों की और बेहतर जानकारी मिल सकेगी। वहीं विभिन्न संकायों के प्राध्यापकों के लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा। विवि इस शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है।

विवि के कुलपति प्रो. नरेंद्र भंडारी ने बताया कि उन्होंने बीते दिनों देहरादून स्थित आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. सुनील कुमार से मुलाकात की और शिक्षा से जुड़ी अनेक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि मुलाकात के बाद विभिन्न विषयों में शैक्षिक गतिविधियों को लेकर दोनों संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया गया।

प्रो. भंडारी ने बताया कि अब योग, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान के प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र छात्राएं आपसी सहमति के बाद शिक्षा व उससे जुड़ी किसी भी गतिविधि का आदान प्रदान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रयोगात्मक कार्यां के अलावा योग, मर्म चिकित्सा, पारंपरिक औषधियों से जुड़े ज्ञान को साझा कर नई निष्कर्ष भी प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने विवि के सभी लोगों से इस एमओयू का पूरा पूरा लाभ उठाने की बात कही है।

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