देहरादून। उत्तराखंड में वार्षिक तबादला सत्र समाप्त होने में अब केवल पांच दिन शेष हैं, लेकिन अधिकांश विभाग अभी तक स्थानांतरण प्रक्रिया को गति नहीं दे पाए हैं। आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के अलावा कुछ चुनिंदा विभागों में ही तबादले हुए हैं, जबकि कई विभाग अब तक तबादला सूची तक तैयार नहीं कर सके हैं।
प्रदेश में उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 लागू है, जिसके तहत प्रत्येक वर्ष 10 जून तक सभी विभागों में स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी की जानी होती है। नियमों के अनुसार किसी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना आवश्यक है।
इस वर्ष उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार बड़े पैमाने पर तबादले करेगी, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग के मानकों का भी पालन हो सके। हालांकि विभागों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण तबादला सत्र लगभग निष्प्रभावी रहने की आशंका जताई जा रही है।
केवल तबादले ही नहीं, बल्कि पदोन्नति के मामलों में भी विभागों की सुस्ती सामने आई है। नियमानुसार वरिष्ठता सूची जारी कर आपत्तियां आमंत्रित करने के बाद पदोन्नति सूची जारी की जानी चाहिए, लेकिन कई विभागों में अभी तक वरिष्ठता सूची भी जारी नहीं हो सकी है।
इस स्थिति पर कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडेय ने कहा कि समयबद्ध पदोन्नति और तबादलों का मुद्दा पहले भी मुख्य सचिव के समक्ष उठाया गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 10 जून के बाद इस विषय पर दोबारा मुख्य सचिव से वार्ता की जाएगी।
