हरिद्वार। हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र और आसपास के गंगा घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग लगातार जोर पकड़ती जा रही है। इस मुद्दे ने उत्तराखंड की राजनीति से लेकर धार्मिक संगठनों तक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर धार्मिक संस्थाएं इसे सनातन परंपरा और गंगा की पवित्रता से जोड़ रही हैं, वहीं विपक्षी दल इसे संविधान के खिलाफ बता रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एस. टी. हसन ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि यदि ऐसा कोई नियम बनाना है तो सबसे पहले संविधान में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा, “यह देश सभी भारतीयों का है, किसी एक समुदाय की निजी संपत्ति नहीं।

संविधान के अनुसार हर भारतीय को देश में कहीं भी आने-जाने का अधिकार है। इस तरह की चर्चाएं समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। अगर कोई अपराध करता है तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा, पूरे समुदाय पर बैन लगाना गलत है।”

वहीं श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग को सनातन परंपरा और मां गंगा की धार्मिक अस्मिता से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र, हर की पौड़ी और आसपास के घाटों में किसी भी गैर-हिंदू व्यक्ति का प्रवेश नहीं होना चाहिए, चाहे वह सरकारी कर्मचारी, संस्था से जुड़ा व्यक्ति या मीडिया कर्मी ही क्यों न हो।

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा, “हरिद्वार ऋषि-मुनियों की भूमि और एक पूज्य धार्मिक स्थल है। वहां की पवित्रता और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।”

फिलहाल यह मुद्दा राज्य में धार्मिक आस्था, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक समरसता के बीच संतुलन को लेकर बड़ी बहस बन चुका है।