शंखनाद INDIA/
निजता के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर फटकार लगाई है, कि आम लोगों की कीमत कई ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट ने वाट्सएप की नई प्राइवेरी पालिसी से लोगों की निजता के हनन की आंशकाओं के प्रति गंभीर चिंता जताते हुए साफ किया है कि भारतीयों की निजता की रक्षा हमारा दायित्व है। कोर्ट ने वाट्सएप को खरा संदेश देते हुए कहा है कि आप दो तीन ट्रिलियन की कंपनी होंगे लेकिन लोगों की निजता की कीमत उससे ज्यादा है। उल्लेखनीय है सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाए गए है कि वाट्सएप ने यूरोप की तुलना में भारतीयों के लिए प्राइवेसी के कमतर मानक तय किए हैं। सोमवार को प्रधान न्यायधीश एसए बोबडे, एएस बोपन्ना और वी. रामसुब्रमण्यन की पीठ ने अर्जी पर चार सप्ताह में वाट्सएप और केंद्र से जवाब मांगा है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को भी जवाब के प्रति उत्तर दाखिल कर वाट्सएप की नई प्राइवेसी पालिसी पर रोक लगाने की मांग की है।
बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील श्याम दीवान ने कहा कि मैसेजिंग एप ने यूरोप की तुलना में भारतीयों के लिए प्राइवेसी के अलग मानक तय किये हैं। इनसे भारतीयों को यूरोपीय लोगों में कम अधिकार मिले हैं। इससे साफ है कि वाट्सएप ने भारतीयों की निजता को कम करके अंाका है। दीवान ने कहा कि वाट्सएप को भारतीयों का डाटा शेयर करने से रोका जाए।
वहीं वाट्सएप की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने यूजर्स के डाटा से समझौता होने के श्याम दीवान के आरोपों को नकार दिया। सिब्बल ने कहा कि 2021 की प्राइवेसी पाॅलिसी यूरोप को छोड़कर सभी जगह लागू होगी। यूरोप में डाटा प्रोटेक्शन का कानून है। अगर भारत मे भी कानून लागू होगा तो उसका पालन किया जाएगा। ध्यान रहे कि वाट्सएप ने अपने सभी ग्राहकों की जानकारी फेसबुक को देने का मन बनाया है जिसे फिलहाल रोका गया है।
पीठ ने कहा कि वह श्याम दीवान की दलीलों से प्रभावित है। दीवान ने कहा नई पालिसी में डाटा शेयरिंग की बात है जो कि निजता का हनन और चिंता का विषय है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म वाट्सएप की प्राइवेसी का मामला पहले संविधान पीठ को यह कहते हुए भेजा था कि इसमें निजजा के अधिकार और निजी स्वतंत्रता का मुद्दा शामिल है।

 

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