शंखनाद INDIA/

पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक निंयत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच पिछले नौ महीनों से चली आ रही तनाव की स्थिति के खत्म होने के ठोस संकेत मिले है। दोनों देशों ने एलएसी पर स्थित पैंगोंग झील के इलाके के फ्रंट लाइन से अपने सैनिकों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चीन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि दोनों देशों के बीच बनी सहमति के मुताबिक सैन्य वापसी का सिलसिला बुधवार को (10 फरवरी 2021)को शुरू हुआ है। भारत ने देर शाम खबर लिखे जाने तक इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की हैं। सदन मे मौजूदा सत्र को देखते हुए संभवतः सरकार बाहर किसी तरह के बयान से बच रही है। माना जा रहा है। कि रक्षा मंत्री मे राजनाथ सिंह स्वयं सदन को इस बारे में जल्द अवगत कराएगें।

बुधवार दोपहर बाद चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वु शियान की तरफ से एक संक्षिप्त बयान जारी किया गया । इसके मुताबिक, भारत और चीन के सैन्य कमांडर स्तर की 9वें दौर की बातचीत मे बनी सहमति के आधार पर पैगोंग हुनान व नार्थ ईस्ट (भारत के पूर्वी लद्दाख से सटे एलएसी के इलाके) चीन व भारत के फ्रंट लाइन युनिट के सैनिकों की वापसी 10 फरवरी से व्यवस्थित तरीके से शुरू हो गई है। चीन सरकार के सभी मीडिया हाउस ने कुछ ही मिनटों में इस खबर को प्राथमिकता से दिखाना शुरू कर दिया। वैसे एक दिन पहले ही दोनों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे पर सहयोग की लेकर बातचीत हुई थी इस बातचीत को तनाव के खत्म होने के संकेत के तौर पर देखा गया था। एलएसी पर चीनी घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर हालात के अलावा किसी दूसरे मुद्दे पर बैठक नहीं हुई है।
आधिकारिक तौर पर भारत ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि, हालात सकारात्मक है । भारत चीन के व्यवहार को पहले भली-भांति परखने के बाद ही अपनी रणनीति सामने रखेगा। वैसे वापसी की शुरूआत भर हुई है और हालात पर काफी सतर्कता से नजन रखने की जरूरत है एलएसी पर हालात को मई, 2020 के पहले वाली स्थिति में ले जाने में अभी वक्त लगेगा। वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भारतीय सेना की मुस्तैदी में कोई कमी नहीं होगी।
मजबूत ठिकानों से सबसे बाद में हटेंगें सैनिकः भारतीय सैनिकों ने रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माने जाने वाले जिन ठिकानो पर अपनी स्थिति मजबूत की है, उसको लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है संभवतः इन ठिकानों से वापसी सबसे अंत में होगी ।भारत-चीन सीमा पर जारी तनावपूर्ण हालात पर अमेरिका लगातार नजर बनाए हुए है। बाइडन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बींजिग लगातार अपने पड़ोसियों को डराने का पैंतरा अपना रहा है जो कि ंिचंता का विषय है। उन्होंने बताया कि दोनेां देशों के बीच जारी बातचीत पर भी अमेरिका की नजर है। अमेरिका विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेट प्राइस ने नियमित होने वाली प्रेस कांफ्रेंस में बताया, ‘हम स्थिति पर करीबी से नजर रखे है।

हम दोनों देशों की सरकार के बीच हो रही बातचीत पर भी नजर रखें है। हम सीमा विवाद का बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण हल पिकालने के पक्ष में हैं।’ बीतंे वर्ष मई महीने में भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख के गलवान घाटी में झड़प् हो गई थी। इसमंे 20 भारतीय जवान जहां शहीद हो गए थे वहीं चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे । इस हिंसा के बाद बीते महीने दोनों देशों के बीच नौवें दौर की सैन्य वार्ता हुई थी। नेड प्राइस ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘बीजिंग द्वारा अपने पड़ोसियों को डराने के रेवैये से हम चितित है। हमेशा की तरह हम अपने दोस्तों, सहयोगियों के साथ खड़े है। हिंद प्रशांत क्षेत्र मे हम एक-दूसरें की सुरक्षा और मुल्यों को बचाने के लिए साथ खडे़ है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका लगातार भारत सरकार के साथ संपर्क में है। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ भारत की नहीं बल्कि हमारे हर सहयोगी देश के लिए यह नीति है। हम एक स्वतंत्र और खुले नागरिक समाज और कानून के मजबूत शासन सहित लोकतान्त्रिक मूल्यों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

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