नैनीताल। कोटद्वार के चर्चित सुमित पटवाल हत्याकांड में नैनीताल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को पलट दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने विशाल उर्फ जॉली, जोनी शर्मा और दीपक सिंह रावत को दोषमुक्त करार देते हुए तत्काल जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने में असफल रहा और पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
यह मामला 22 मार्च 2015 का है, जब कोटद्वार के बेलाघाट क्रॉसिंग पर बाइक सवार हमलावरों ने प्रॉपर्टी डीलर सुमित पटवाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। निचली अदालत ने विशाल और जोनी को आजीवन कारावास तथा दीपक रावत को धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया था। चौथे आरोपी सुरेंद्र सिंह की अपील लंबित रहते मृत्यु हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सीसीटीवी फुटेज की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के तहत आवश्यक प्रमाण पत्र के बिना ऐसे साक्ष्य स्वीकार्य नहीं हैं। पहचान मेमो में गवाहों के बयान विरोधाभासी पाए गए, वहीं किसी भी चश्मदीद गवाह ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया।
पिस्तौल की बरामदगी सार्वजनिक स्थान से होने और फॉरेंसिक साक्ष्यों की सुरक्षित अभिरक्षा में खामी के चलते कोर्ट ने अभियोजन को संदेह से परे प्रमाणित न मानते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। इस फैसले से स्पष्ट है कि न्यायपालिका साक्ष्यों की प्रमाणिकता और निष्पक्ष जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
