नई दिल्ली। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सांसद एल.एस.के. देवरायलु ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाना, चलाना या बनाए रखना गैरकानूनी होगा। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत समेत दुनिया भर में युवाओं की सेहत और सुरक्षा पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है।

सांसद देवरायलु ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि सोशल मीडिया की लत बच्चों में तेजी से बढ़ रही है और भारत विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए दुनिया के सबसे बड़े डेटा उत्पादकों में शामिल हो गया है। उनका आरोप है कि भारतीय यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल कर कंपनियां उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम विकसित कर रही हैं, जबकि इससे होने वाले रणनीतिक और आर्थिक लाभ देश के बाहर जा रहे हैं। उन्होंने भारतीय यूजर्स को “बिना भुगतान वाले डेटा प्रदाता” बताया।

प्रस्तावित सोशल मीडिया (आयु प्रतिबंध और ऑनलाइन सुरक्षा) बिल करीब 15 पन्नों का है। हालांकि यह अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन इसमें स्पष्ट किया गया है कि 16 वर्ष से कम उम्र के किसी भी किशोर को सोशल मीडिया अकाउंट रखने की अनुमति नहीं होगी और पाए जाने पर ऐसे अकाउंट को निष्क्रिय किया जाएगा। देवरायलु का कहना है कि यूजर्स की उम्र सत्यापित करने की पूरी जिम्मेदारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डाली जानी चाहिए।

यह बिल एक प्राइवेट मेंबर्स बिल है, जिसे किसी केंद्रीय मंत्री ने पेश नहीं किया है, लेकिन ऐसे प्रस्ताव अक्सर संसद में व्यापक चर्चा को जन्म देते हैं। भारत के आईटी मंत्रालय और मेटा, यूट्यूब की मूल कंपनी अल्फाबेट तथा एक्स ने इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना है। फ्रांस, ब्रिटेन, डेनमार्क, ग्रीस और जर्मनी में भी इस मुद्दे पर विचार हो रहा है। भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, में इस प्रस्ताव को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना है।