ghibli

सोशल मीडिया पर जो ट्रेंड चलता है हर कोई उसके पीछे भागने लगता है और उसे ट्राई करता है। ये आजकल बिल्कुल नार्मल बात हो गई है। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ट्रेंड चला कि जिसकी बाढ़ सी आ गई है। जी हां हम बात कर रहे हैं इन द‍िनों खूब वायरल हो रहे Ghibli Style की। इसकी सबसे खास बात ये है कि अगर आपकी फोटो थोड़ी ब्लर है या फेस पर पिंपल है तो Ghibli स्‍टाइल का होते ही सारी गड़बड़‍ियां गायब हो जाएंगी और आपको आपकी प्यारी से फोटो मिलेगी। ये लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि हर ओर यही फोटोस नजर आ रही हैं।

GHIBLI ट्रेंड मजेदार नहीं बन सकता है सजा

ट्रेंड के चक्‍कर में लोग बिना सोचे समझे आज ज‍िन प्राइवेट तस्‍वीरों को शेयर कर रहे हैं वो कहां जा रही हैं ? क्या आपको ये बात पता है कि आपकी ये प्राइवेट फोटोज इन AI प्‍लेटफॉर्म्‍स पर सेव होती जा रही हैं और भविष्य में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

ChatGPT और Grok जैसे प्‍लेटफॉर्मों द्वारा शुरू किए गए ट्रेंड से लोग इतने प्रभावित हुए हैं कि मानों इस पर टूट पड़े हों। हर किसी में Ghibli स्‍टाइल फोटो बनाने की होड़ लगी हुई है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि ये ट्रेंड आपकी रातों की नींद भी चुरा सकता है। अगर आप बिना सोचे समझे अपनी फोटोस को AI के हवाले कर रहे हैं तो आपको थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अगर आपने यभी Ghibli Image बनाई हैं या ट्राई करने की सोची है तो जरा यहां ध्यान दें।

ये आपकी प्राइवेसी के लिए हो सकता है खतरा

Ghibli Image के ट्रेंड के चक्कर में प्राइवेट तस्वीरों को किसी और को सौंप रहे हैं। जी हां एआई के हवाले अपनी तस्वीरों को करना बिल्कुल ऐसा ही है क्योंकि इस ट्रेंड के चलते ChatGPT के पास लोगों के कई निजी तस्वीरों का एक्सेस आ जाएगा। भविष्य में वो इनका इस्तेमाल किस करह करेगा इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।

Ghibli ट्रेंड की वजह से OpenAI को यूजर्स के फेशियल डेटा को एक्सेस करने की आजादी मिल रही है। ये ही लोगों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। इस तरह की तस्वीरों का इस्तेमाल बड़ी कंपनियां यूजर्स को AI मॉडल के लिए ट्रेन करने में भी कर सकती हैं। बता दें कि कुछ साल पहले भी ऐसा ही मामला सामने आया था। जब Clearview AI नाम की एक कंपनी पर बिना परमिशन के सोशल मीडिया और वेबसाइट से लोगों की तस्वीर चुराने का आरोप लगा था और पुलिस व प्राइवेट कंपनियों को बेच दिया था। बता दें कि डेटा चोरी होने के बाद ये डेटा ब्लैक मार्केट में बिकता है। इस से सिंथेटिक आइडेंटिटी फ्रॉड या फिर डीपफेक बनाने जैसे स्कैम होते हैं।

चौंकाने वाली है ये रिपोर्ट

आपको बता दें कि Statista की रिपोर्ट के मुताबिक फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का बाजार इस साल 2025 में 5.73 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। जबकि आज से पांच साल बाद साल 2031 तक इसके 6.79 फीसदी की CAGR से 14.55 बिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

मेटा और गूगल जैसी कंपनियों पर कई बार आरोप लगते हैं कि वो अपने यूजर्स की फोटोज से अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करती हैं। लेकिन ये कंपनियां इसकी जानकारी शेयर नहीं करती। PimEyes जैसी साइट्स किसी की भी फोटो से उन्हें ऑनलाइन ढूंढने की सुविधा देती हैं, जिससे स्टॉकिंग का खतरा बढ़ता है।