देहरादून। उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी की जा सकती है। लगातार गिरते राजस्व से जूझ रहे परिवहन विभाग ने इस विकल्प पर गंभीरता से पुनर्विचार शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार बीते तीन वर्षों से विभाग का राजस्व लगातार कमजोर हो रहा है, जिसके चलते नए संसाधन तलाशे जा रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक परिवहन विभाग की सालाना राजस्व वृद्धि दर वर्ष 2022-23 में जहां 36.33 प्रतिशत थी, वहीं 2024-25 में घटकर मात्र 6.04 प्रतिशत रह गई है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक यह वृद्धि 8.82 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसी पृष्ठभूमि में विभाग इलेक्ट्रिक वाहनों पर आंशिक टैक्स लगाने की संभावना पर विचार कर रहा है।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों को रजिस्ट्रेशन टैक्स और राष्ट्रीय परमिट शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है। विभाग इस छूट में सीमित कटौती कर कुछ प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
सूत्रों के अनुसार हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित राजस्व समीक्षा बैठक में भी परिवहन विभाग की कमजोर वित्तीय स्थिति पर चर्चा हुई थी। इसी बैठक के बाद ईवी टैक्स समेत अन्य विकल्पों पर मंथन तेज हुआ है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में सामान्य वाहनों पर कीमत के आधार पर सात से 10 प्रतिशत तक रजिस्ट्रेशन टैक्स लिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 11 लाख रुपये कीमत के वाहन पर 1.10 लाख रुपये टैक्स देना होता है। वहीं, ईवी को इस टैक्स से पूरी छूट है। वर्तमान में राज्य में दोपहिया से चारपहिया तक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 80 हजार से अधिक हो चुकी है। यदि ईवी पर आंशिक टैक्स लागू होता है, तो राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
