शंखनाद INDIA/मुन्ना अंसारी/लालकुआँ :- अखिल भारतीय किसान महासभा की बैठक दीपक बोस भवन कार रोड बिंदुखत्ता में सम्पन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा माले के राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून आम गरीब जनता की रोटी पर हमला करने वाले हैं। अडानी के लाखों टन क्षमता वाले अनाज गोदामों को कैसे भरा जाय मोदी सरकार को इसी की चिंता है। इसीलिए किसान आंदोलन के पचास दिनों और सत्तर शहादतों के बाद भी केंद्र की मोदी सरकार किसानों के विरोध में डटी हुई है ।

किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के आंदोलन को तोड़ने के लिए किसानों पर भ्रमित होने, खालिस्तानी, पाकिस्तानी, आतंकवादी, माओवादी होने के आरोप लगाकर दमन करने और आन्दोलन को तोड़ने की लगातार साजिश की और अब सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से कानूनों की वापसी के मुद्दे से आन्दोलन को भटकाने की कोशिश कर रही है। इसीलिए आन्दोलनकारी किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सामने पेश होने से मना करते हुए इस मामले में किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से साफ इन्कार कर दिया है ।

किसान महासभा के जिलाध्यक्ष बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि खेती-खेती और किसानी बचाने के लिए किसानों के “मौत के फरमान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशानुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाकर सरकारी खरीद की गारंटी कराने के लिए इस आंदोलन भूमिका महत्वपूर्ण है इसलिए सभी किसानों को इसमें बढ़चढ़कर भूमिका निभानी चाहिए।

बैठक में 25 जनवरी की किसान रैली के लिए विभिन्न क्षेत्रों की टीमें गठित की गई और किसान यात्रा को और सघन बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई।

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