नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते संकट को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को इस मुद्दे पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की पहली उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संघर्ष के भारत पर संभावित प्रभावों, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र सरकार पहले ही हालात की समीक्षा के लिए कई दौर की बैठकों का आयोजन कर चुकी है। सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि ईंधन की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी और किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। विदेश मंत्रालय भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है।

इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों तथा उपराज्यपालों के साथ डिजिटल माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उसके भारत पर संभावित प्रभावों को देखते हुए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, पीएम मोदी ने राज्यों से मिले सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक हालात से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारी और समन्वित कार्रवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने का पहले से अनुभव है।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों द्वारा ‘टीम इंडिया’ के रूप में किए गए संयुक्त प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि वही सहयोग और तालमेल आज भी देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी राज्यों से मिलकर काम करने और संभावित चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आह्वान किया।