केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में देश का आम बजट पेश किया। यह उनका नौवां बजट रहा, जिसमें सरकार ने परिवहन और रक्षा क्षेत्रों पर सबसे अधिक खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। दोनों ही क्षेत्रों के लिए लगभग 6-6 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिससे बुनियादी ढांचे को मजबूती देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।

बजट प्रस्तावों के मुताबिक परिवहन क्षेत्र के लिए सर्वाधिक 5,98,520 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। वहीं रक्षा क्षेत्र को 5,94,585 करोड़ रुपये दिए गए हैं। गृह मंत्रालय के लिए 2,55,234 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों पर 1,62,671 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शिक्षा क्षेत्र के लिए 1,39,289 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य के लिए 1,04,599 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र को 1,09,029 करोड़ रुपये, शहरी विकास को 85,522 करोड़ रुपये, आईटी और टेलिकॉम सेक्टर को 74,560 करोड़ रुपये तथा वाणिज्य एवं उद्योग को 70,296 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सामाजिक कल्याण, वैज्ञानिक विभागों, टैक्स प्रशासन, विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और पूर्वोत्तर विकास के लिए भी अलग-अलग मदों में धन का प्रावधान किया गया है।

बजट दस्तावेजों के अनुसार सरकार ने यह भी बताया है कि राजस्व कहां से आएगा। कुल बजट का 24 प्रतिशत हिस्सा सरकार उधार लेकर जुटाएगी। आयकर से 21 प्रतिशत और कॉर्पोरेट टैक्स से 18 प्रतिशत राजस्व मिलने की उम्मीद है। जीएसटी और अन्य करों से 15 प्रतिशत, नॉन-टैक्स रेवेन्यू से 10 प्रतिशत और अन्य स्रोतों से शेष राशि प्राप्त होगी।

खर्च के विवरण में बताया गया है कि सबसे अधिक 22 प्रतिशत राशि राज्यों को टैक्स में हिस्सेदारी देने पर खर्च होगी। ब्याज भुगतान पर 20 प्रतिशत और केंद्रीय योजनाओं पर 17 प्रतिशत राशि खर्च करने का प्रस्ताव है।

रक्षा पर 11 प्रतिशत, केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर 8 प्रतिशत, सब्सिडी पर 6 प्रतिशत और अन्य मदों में 7 प्रतिशत राशि खर्च की जाएगी। यह बजट विकास, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।