देहरादून। दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे जहां राष्ट्रीय राजधानी और उत्तराखंड के बीच यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, वहीं इसके चलते राज्य की राजधानी देहरादून के भीतर ट्रैफिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका भी गहराती जा रही है। विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि तेज रफ्तार से आने वाला यातायात शहर के प्रवेश द्वारों पर जाम की स्थिति पैदा कर सकता है, खासकर आशारोड़ी और जोगीवाला जैसे क्षेत्रों में।
एक्सप्रेसवे की घोषणा के साथ ही यह चिंता सामने आने लगी थी कि शहर की आंतरिक सड़कों की क्षमता इतनी नहीं है कि वह अचानक बढ़ने वाले वाहनों के दबाव को संभाल सके। चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान पहले से ही वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में एक्सप्रेसवे के पूरी तरह शुरू होने के बाद यह दबाव और बढ़ने की संभावना है।
बढ़ेगा बॉटलनेक का खतरा
पहले देहरादून से दिल्ली जाने के लिए लोगों के पास दो प्रमुख मार्ग थे पुराना मार्ग और हरिद्वार होकर जाने वाला रास्ता। लेकिन अब नया एक्सप्रेसवे अधिक सीधा और चौड़ा होने के कारण यातायात का मुख्य केंद्र बन जाएगा। इससे आशंका है कि आशारोड़ी से शहर के भीतर आने में उतना ही समय लग सकता है जितना दिल्ली से दून पहुंचने में।
जोगीवाला क्षेत्र पहले से ही ट्रैफिक बॉटलनेक के रूप में जाना जाता है। हरिद्वार फोरलेन बनने के बाद यहां ट्रैफिक का दबाव बढ़ा, लेकिन पर्याप्त चौड़ीकरण और प्रबंधन के अभाव में समस्या जस की तस बनी रही। अब इसी तरह की स्थिति आशारोड़ी क्षेत्र में बनने की संभावना जताई जा रही है।
वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि
देहरादून में पिछले पांच वर्षों में पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग 90 हजार से बढ़कर 1.30 लाख तक पहुंच चुकी है। पुलिस का अनुमान है कि एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद पीक समय में वाहनों की संख्या तीन से चार गुना तक बढ़ सकती है। ट्रैफिक पुलिस एक सप्ताह का डेटा जुटाने के बाद आगे की रणनीति तय करेगी।
इन इलाकों में बढ़ेगा दबाव
शहर के प्रमुख मार्ग जैसे रिस्पना पुल, जीएमएस रोड, राजपुर रोड, सहारनपुर रोड, आईएसबीटी क्षेत्र, घंटाघर, सहस्रधारा रोड और मसूरी मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की आशंका है। खासतौर पर वीकेंड और पर्यटन सीजन में जाम की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
चुनौतियां और तैयारियां
शहर में बाईपास मार्गों की कमी, पार्किंग का अभाव, वीआईपी मूवमेंट, जुलूस-धरना और भौगोलिक सीमाएं प्रमुख चुनौतियां हैं। इसके समाधान के लिए पुलिस ने शॉर्ट और लॉन्ग टर्म प्लान तैयार किया है।
शॉर्ट टर्म में संकेतक बोर्ड, अतिरिक्त पुलिस बल, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और भारी वाहनों की नो-एंट्री लागू की जाएगी। वहीं लॉन्ग टर्म में मल्टीलेवल पार्किंग, एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर और अंडरपास निर्माण जैसे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं।
कारोबार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
हालांकि चुनौतियों के बीच एक्सप्रेसवे से देहरादून के व्यापार और उद्योग को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। यात्रा समय छह घंटे से घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगा, जिससे व्यापारियों के लिए दिल्ली तक पहुंच आसान होगी। उद्योग जगत का मानना है कि इससे एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट गतिविधियों में तेजी आएगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पीएम दौरे से पहले हाई अलर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वह 14 अप्रैल को एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करने के साथ ही मां डाट काली मंदिर में दर्शन करेंगे और गढ़ी कैंट तक रोड शो भी करेंगे। इसके चलते एक्सप्रेसवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और वैकल्पिक रूट लागू किए गए हैं।
पुलिस और प्रशासन ने 360 डिग्री सुरक्षा व्यवस्था लागू करते हुए ट्रैफिक प्लान तैयार किया है, ताकि आम जनता को कम से कम असुविधा हो।
निष्कर्ष
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे जहां विकास और कनेक्टिविटी का नया अध्याय खोलेगा, वहीं यह देहरादून शहर के लिए ट्रैफिक प्रबंधन की एक बड़ी परीक्षा भी साबित होगा। यदि समय रहते बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया गया, तो तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे का लाभ शहर के भीतर जाम में फंस सकता है।
