हरिद्वार। उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मृत श्रमिकों के आश्रितों को दी जाने वाली सरकारी सहायता राशि में जीवित श्रमिकों को मृत दर्शाकर दो-दो लाख रुपये की धनराशि हड़पने का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि यह गड़बड़झाला श्रम विभाग के कुछ अधिकारियों, श्रमिक सुविधा केंद्रों और दलालों की मिलीभगत से किया जा रहा है।

योजना के तहत पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु के बाद उसके आश्रितों को दो लाख रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाती है। इसके लिए श्रमिक सुविधा केंद्रों से आवेदन कर श्रम प्रवर्तन अधिकारी के माध्यम से अनुमोदन कराया जाता है। इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जीवित श्रमिकों को मृत घोषित कर राशि जारी कराई गई।

बताया जा रहा है कि अधिकांश फर्जीवाड़ा बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र में हुआ है। धनराशि आश्रितों के खाते में भेजने के बाद उसमें से केवल 70 हजार से एक लाख रुपये ही उन्हें दिए गए, जबकि शेष रकम दलालों और संबंधित अधिकारियों में बांट दी गई।

सितंबर में पहली बार ग्राम बादशाहपुर और नसीरपुर कलां में दो पुरुष श्रमिकों को मृत दिखाकर राशि निकाली गई। इसके बाद नई कुंडी बिशनपुर में दो महिला श्रमिकों तथा खाला टीरा में एक श्रमिक को मृत दर्शाकर दो लाख रुपये की धनराशि ट्रांसफर कराई गई। जांच में फर्जी मामलों की संख्या सौ से अधिक पहुंचने की आशंका है।

उप श्रमायुक्त विपिन कुमार ने बताया कि मौखिक शिकायत प्राप्त हुई है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वहीं भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री सुमित सिंघल ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।