देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग को लेकर उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रविवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच किया।
इस दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिस पर कई बार पुलिस और आक्रोशित लोगों के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर भी चढ़ गए। बाद में विभिन्न संगठनों की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका कहना था कि बढ़ती महिला हिंसा गंभीर चिंता का विषय है और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए जनता शुरू से ही सड़कों पर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो चक्का जाम जैसे आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।
इसी मुद्दे को लेकर रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रवासी उत्तराखंडियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विभिन्न संगठनों और विपक्षी दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार पर दोषियों और वीआईपी को बचाने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप और हरिपाल रावत ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई को नहीं सौंपी गई, तो भाजपा मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।
दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस पर इस मामले में राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। लैंसडौन चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पुतला दहन किया। भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रारंभ से ही एसआईटी गठित कर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस तथ्यों को नजरअंदाज कर जनता को भ्रमित कर रही है।
