देहरादून। उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) की स्थापना का मामला मंत्रिमंडल के वर्ष 2019 के फैसले के छह साल बाद भी अधर में लटका हुआ है। रानीपोखरी में विश्वविद्यालय स्थापित करने के निर्णय के बावजूद अब तक न तो भूमि हस्तांतरण पूरा हो पाया है और न ही निर्माण कार्य शुरू हो सका है।

यह खुलासा भाजपा नेता रविंद्र जुगरान द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग से 14 बिंदुओं पर मांगी गई सूचना के जवाब में करीब 400 पृष्ठों के दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिनमें कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

सूचना के अनुसार, वर्ष 2019 में उच्च न्यायालय की फुल कोर्ट के संकल्प को मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जिसके बाद रानीपोखरी (लिस्ट्राबाद) में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भूमि पूजन भी किया था और निर्माण कार्य के लिए ब्रिडकुल को कार्यदायी संस्था नामित किया गया था।

हालांकि, इसके बाद विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर स्थान बदलने की कवायद भी शुरू हो गई। अप्रैल 2023 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुमाऊं मंडल के किच्छा (ऊधमसिंह नगर) और गौलापार (हल्द्वानी) में भूमि तलाशने का निर्णय लिया गया। लेकिन बाद में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय रानीपोखरी में ही स्थापित किया जाए, जहां पहले ही भूमि पूजन हो चुका है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अधिनियम वर्ष 2011 में पारित हुआ था, जिसमें 2018 में संशोधन भी किया गया। बावजूद इसके, रानीपोखरी स्थित राजकीय रेशम फार्म की 10 एकड़ भूमि का उच्च शिक्षा विभाग को हस्तांतरण अब तक लंबित है।

रविंद्र जुगरान ने बताया कि उत्तराखंड के साथ बने झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में क्रमशः 2003 और 2010 में ही राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं, जबकि उत्तराखंड अब भी इस मामले में पीछे है।