देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी के दूसरे दिन संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने संघ की कार्यप्रणाली, समाज में अनुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
डॉ. भागवत ने कहा कि सेना के जवान संघ के बौद्धिक पक्ष को छोड़ दें तो बाकी लगभग पूरी ट्रेनिंग पा चुके होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ हथियारों की ट्रेनिंग नहीं देता, क्योंकि इसके लिए देश की सेना और अन्य सुरक्षा संस्थान जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को यदि संघ के विचार और कार्यशैली समझाई जाए तो उनके लिए इसे समझना अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि वे अनुशासन, सेवा और संगठनात्मक ढांचे से पहले से परिचित होते हैं।
संघ प्रमुख ने समाज में अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सेना की तरह ही समाज भी सुव्यवस्थित तरीके से चल सकता है, यदि लोगों में कर्तव्यबोध और अनुशासन की भावना विकसित हो। संवाद के दौरान पूर्व सैनिकों ने सामाजिक संगठन, राष्ट्र निर्माण और सुरक्षा से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. भागवत ने बेबाकी और विस्तार से उत्तर दिया।
कार्यक्रम में मंच पर उत्तराखंड प्रांत संघ चालक बहादुर सिंह बिष्ट और क्षेत्र संचालक सूर्य प्रकाश टोंक भी उपस्थित रहे। यह संवाद कार्यक्रम संघ शताब्दी समारोह के प्रमुख आयोजनों में से एक रहा, जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों और स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
