देहरादून। प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार अब अहम कदम उठाने की तैयारी में है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सैकड़ों सीटों से आरक्षण हटाकर उन्हें सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया जा सकता है। पंचायतीराज निदेशालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।
दरअसल, पिछले वर्ष जुलाई में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान ग्राम पंचायत सदस्यों के हजारों पदों पर किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं किया था। इसके बाद उपचुनाव कराए गए, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। वर्तमान में ग्राम पंचायत सदस्यों के 3846 पद, ग्राम प्रधान के 16 पद और क्षेत्र पंचायत सदस्य के तीन पद अब भी रिक्त हैं।
निदेशालय के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को छोड़कर अन्य अधिकांश खाली पदों को सामान्य घोषित कर तीसरी बार चुनाव कराने की तैयारी है। विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने भी इन सीटों को सामान्य करने की सिफारिश शासन को भेजी है।
इस बीच, 33 ग्राम प्रधान ऐसे हैं जो निर्वाचित होने के आठ महीने बाद भी शपथ नहीं ले सके हैं। इसका मुख्य कारण ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा न होना है, जिससे पंचायतों का गठन अधर में लटका हुआ है।
प्रदेश में कुल 7817 ग्राम पंचायतें, 3195 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 402 जिला पंचायत सदस्य पद हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सरकार जल्द ही खाली पदों को भरने के लिए नई चुनाव प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
पंचायतीराज निदेशक निधि यादव ने बताया कि प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
