देहरादून। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर छह महीने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद राजधानी दून में खाताधारकों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला। आरबीआई ने जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा का हवाला देते हुए बैंक की गतिविधियों पर रोक लगाई है, जिससे करीब 9,000 खाताधारकों के लगभग 90 करोड़ रुपये फंस गए हैं।
प्रतिबंध की खबर मिलते ही मंगलवार दोपहर बड़ी संख्या में खाताधारक बैंक शाखा पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज लोगों ने नारेबाजी करते हुए बैंक प्रबंधन से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की। स्थिति बिगड़ती देख बैंककर्मी निचले तल में एक कमरे में बंद हो गए, जबकि हंगामे की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
खाताधारकों का कहना है कि बैंक से पैसे न मिलने के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और लेनदार लगातार भुगतान का दबाव बना रहे हैं। खाताधारक नरेंद्र बत्रा, जो पिछले 32 वर्षों से बैंक से जुड़े हैं, ने कहा कि बैंक अधिकारी लंबे समय से सही जानकारी देने से बचते रहे हैं, जिससे ग्राहकों में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
एक अन्य खाताधारक मुकेश शर्मा ने बताया कि उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और बैंक को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उनकी जमा राशि कब और कैसे लौटाई जाएगी। खाताधारकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे और इस संबंध में उन्होंने पुलिस को भी लिखित शिकायत सौंपी है।
उल्लेखनीय है कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना 30 जुलाई 1973 को हुई थी और यह आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त बैंक है। इससे पहले वर्ष 2020 में यस बैंक पर प्रतिबंध लगने के बाद भी ग्राहकों में भारी घबराहट फैल गई थी, जब लोग सुबह से ही अपनी जमा राशि निकालने के लिए बैंकों के बाहर कतार में खड़े हो गए थे।
