दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में एक दिल दहला देने वाली रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें नेपाल में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान एक भारतीय महिला की मौत के लिए जवाबदेही तय करने और 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। यह याचिका स्वर्गीय राजेश गोला के पति रणबीर सिंह गोला ने सुप्रीम कोर्ट के पीआईएल एक्टिविस्ट और एडवोकेट अभिषेक चौधरी के माध्यम से दाखिल की है।
याचिका के अनुसार, रणबीर सिंह गोला और उनकी पत्नी 7 सितंबर 2025 को धार्मिक यात्रा पर नेपाल गए थे और काठमांडू के एक फाइव स्टार इंटरनेशनल होटल में ठहरे हुए थे। 9 सितंबर 2025 को ‘जेन Z प्रोटेस्ट’ के दौरान काठमांडू में हिंसा, आगजनी और अराजकता फैल गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि होटल प्रबंधन ने स्थिति बिगड़ने के बावजूद मेहमानों को यह कहकर रोक लिया कि हालात नियंत्रण में हैं और उन्हें चेक-आउट की अनुमति नहीं दी गई।
रिट में दावा किया गया है कि 9 सितंबर की रात एक हिंसक भीड़ ने होटल परिसर पर हमला किया और इमारत के कुछ हिस्सों में आग लगा दी। इसके बावजूद होटल में न तो फायर अलार्म बजा, न ही किसी इवैक्यूएशन प्रोटोकॉल का पालन किया गया। आरोप है कि होटल स्टाफ मौके से भाग गया, जिससे मेहमान जलती इमारत में फंस गए।
याचिका के मुताबिक, खतरा बढ़ने पर भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय को कई बार इमरजेंसी कॉल की गई, लेकिन कोई मदद या बचाव नहीं मिला। मजबूरी में दंपती ने रस्सियों के सहारे भागने की कोशिश की, इसी दौरान राजेश गोला चौथी मंजिल से गिर गईं।
गंभीर रूप से घायल राजेश को समय पर और उचित इलाज नहीं मिला और बाद में एक स्थानीय अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नेपाल सरकार ने इस मामले को हत्या के रूप में दर्ज किया है।
याचिका में कहा गया है कि नेपाल में अशांति के दौरान जान गंवाने वाली वह एकमात्र भारतीय नागरिक थीं। रिट में अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार, कांसुलर सुरक्षा में विफलता, न्यायिक जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भारत सरकार व होटल प्रबंधन से संयुक्त रूप से 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। याचिका में विदेशों में संकट के समय भारतीय नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी अपील की गई है।
