लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा दौर की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संवाद और समझ की जगह टकराव और हिंसा का माहौल बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में लोग एक-दूसरे को समझने की कोशिश करने के बजाय असहमति होने पर आक्रामक रवैया अपना लेते हैं, जो लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए चिंताजनक है।

राहुल गांधी एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जो महात्मा गांधी और समाज सुधारक संत नारायण गुरु की ऐतिहासिक मुलाकात की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी यही प्रवृत्ति दिखाई देती है, जहां मतभेद होने पर संवाद के बजाय हिंसा और ताकत का सहारा लिया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश की राजनीति में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिलती है। अगर कोई व्यक्ति या समूह किसी विचार से सहमत नहीं होता, तो उसके साथ चर्चा करने के बजाय उस पर हमला किया जाता है या उसे दबाने की कोशिश की जाती है। राहुल गांधी ने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

अपने संबोधन में उन्होंने महात्मा गांधी और नारायण गुरु के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही महान व्यक्तित्व हिंसा और नफरत के विरोधी थे। उन्होंने समाज में प्रेम, सम्मान, समानता और आपसी समझ को बढ़ावा देने की बात कही थी। राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय संविधान में भी इन्हीं मूल्यों और सिद्धांतों को समाहित किया गया है।

उन्होंने महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष का उदाहरण देते हुए शक्ति और बल के बीच अंतर को स्पष्ट किया। राहुल गांधी ने कहा कि ब्रिटिश शासन के पास सैन्य बल और संसाधन थे, लेकिन नैतिक शक्ति नहीं थी, जबकि महात्मा गांधी के पास बाहरी बल नहीं था, लेकिन सत्य और अहिंसा की ताकत थी।

उन्होंने कहा कि नारायण गुरु के पास न धन-दौलत थी और न ही सत्ता, फिर भी वे अपने समय में केरल के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में गिने जाते थे। राहुल गांधी ने कहा कि गांधी और नारायण गुरु का संदेश आज भी प्रासंगिक है कि हिंसा और नफरत से कोई समाधान नहीं निकलता, बल्कि इससे समाज को नुकसान ही होता है।