उत्तराखंड में इंजीनियरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब साफ तौर पर विकास कार्यों पर दिखने लगा है। हड़ताल के चलते सरकारी ठेकेदारों ने भी काम रोक दिया है, जिससे सड़क, पुल और पेयजल योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। भुगतान लंबित होने से पहले से ही परेशान ठेकेदारों ने काम में रुचि कम कर दी है।

उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, जल संस्थान, पेयजल निगम, आरडब्ल्यूडी और यूयूएसडीए समेत विभिन्न विभागों के करीब 1100 अभियंता हड़ताल पर हैं। इसके कारण कई परियोजनाओं की निगरानी ठप हो गई है।

हड़ताल का असर जमरानी बांध परियोजना से लेकर हल्द्वानी, कालाढूंगी और लालकुआं क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ा है। कई जगहों पर सड़कें अधूरी पड़ी हैं, जिससे रोजाना 50 से 60 हजार लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।

चकलुवा के पास बन रहे करीब तीन करोड़ की लागत वाले पुल का काम भी निरीक्षण के अभाव में अटका हुआ है। वहीं पेयजल निगम की 154 करोड़ की परियोजना, जिसमें फिल्टर प्लांट और पाइपलाइन बिछाने का कार्य शामिल है, धीमी गति से चल रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, इंजीनियरों की गैरमौजूदगी में काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि यूयूएसडीए में संविदा अभियंताओं के सहारे कुछ कार्य जारी हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग की परियोजनाएं पूरी तरह प्रभावित हैं।

ठेकेदारों का कहना है कि एई और जेई के बिना काम संभव नहीं है और भुगतान अटकने से स्थिति और खराब हो गई है। उन्होंने जल्द समाधान की मांग की है, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।