प्रदेश में अवैध मदरसों के खिलाफ लगातार अभियान जारी है। अब तक प्रदेश में 100 से भी ज्यादा मदरसे सील किए जा चुके हैं। जिसे लेकर प्रदेश में राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने राज्य मे अवैध मदरसों की फंडिंग की जांच को लेकर विपक्षी कांग्रेस की तिलमिलाहट को स्वभाविक बताते हुए कहा कि समुदाय विशेष के प्रति उसके प्रेम का आकलन और जवाब जनता देगी।
अवैध मदरसों के खिलाफ कांग्रेस की तिलमिलाहट स्वाभाविक
अवैध मदरसों को लेकर कांग्रेस के विरोध को लेकर भाजपा प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने कार्रवाई के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंडियत का ज्ञान बांटने वाले देवभूमि का स्वरूप बिगाड़ने की मंशा से खुले अवैध मदरसों के पक्ष में खड़े हैं। यदि इस शैक्षणिक सफाई के अभियान में वे साथ नहीं आए तो जनता द्वारा अगले चुनावों में उन्हे जवाब देगी।
राज्य की डेमोग्राफी को संरक्षित करने की कोशिश
मनवीर सिंह चौहान ने कहा भारतीय जनता पार्टी हमेशा से देवभूमि की संस्कृति, पहचान और शांत माहौल के लिए कटिबद्ध रही है। यही वजह है कि हमारी सरकार ने इन तीन सालों में जन भावनाओं के अनुसार ऐसे तमाम निर्णय लिए हैं जिससे राज्य की डेमोग्राफी और उसके स्वरूप को पूर्णतया संरक्षित किया जाए।
राज्य में यूसीसी, धर्मांतरण, दंगारोधी और अवैध धार्मिक अतिक्रमणों पर कार्रवाई के बाद ऐसे शिक्षण संस्थानों पर भी रोक लगाने की जरूरत महसूस की जा रही थी, जहां शिक्षा की आड़ में कट्टरता परोसी जा रही है। आज पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता और देवभूमि वासी मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों पर अवैध मदरसों के खिलाफ उठाये गए कदमों से बेहद खुश है। वहीं उम्मीद जताई कि शेष बचे अवैध मदरसों पर भी शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी।
अवैध मदरसों पर कार्रवाई का बीजेपी करती है समर्थन
चौहान ने कहा कि जहां तक अवैध पाए गए मदरसों को हुई फंडिंग के जांच की बात है तो पार्टी इसका पुरजोर समर्थन करती है। हम पहले से इस बात के हिमायती रहे हैं कि छोटे और सनातन संस्कृति वाले राज्य में इतनी बड़ी संख्या में मदरसों की क्या आवश्यकता है। जब समुदाय विशेष के बच्चों की संख्या सीमित है तो इन तमाम तथाकथित मदरसों में कहां के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे? जब इनमें शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम थी तो इन संस्थाओं को संचालित करने के लिए धन कहां से आता था? ये जानना भी जरूरी है कि इन संस्थाओं के आय के स्रोत क्या थे और वह कौन से लोग थे जो इनकी मदद कर रहे थे?
उन्होंने कहा कि पूर्व में जब अवैध धार्मिक कब्जों से भूमि मुक्त कराई गई तो भी उन्हें बहुत तकलीफ हुई। राज्य के खान-पान और बोली-भाषा मे उन्हें उत्तराखंड की याद आती है। लेकिन राज्य के देवभूमि स्वरूप को बचाना उनके लिए अहम नहीं है। कांग्रेस का यही दोहरा रवैया उसे जनता से दूर कर रहा है।