देहरादून। देश में जनगणना के पहले चरण की शुरुआत स्व-गणना (Self Enumeration) से हो चुकी है। इस बीच जनगणना विभाग ने नागरिकों को साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्व-गणना के लिए केवल एक ही आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in है और इसके अलावा कोई मोबाइल ऐप या अन्य वेबसाइट मान्य नहीं है।

अधिकारियों के अनुसार, स्व-गणना के दौरान नागरिकों को अपने मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता, आधार नंबर या ओटीपी की मांग करता है, तो यह साइबर अपराध का संकेत हो सकता है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनधिकृत कॉल या लिंक से सावधान रहें।

विभाग ने यह भी बताया कि 25 अप्रैल से प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। प्रगणक केवल सवाल पूछेंगे और किसी भी प्रकार का दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड, नहीं मांगेंगे। स्व-गणना कर चुके लोगों से केवल एसई आईडी की पुष्टि की जाएगी, जबकि अन्य लोगों से लगभग 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें मोबाइल नंबर भी शामिल होगा, लेकिन उस पर कोई ओटीपी नहीं आएगा।

प्रगणकों की पहचान उनके आधिकारिक आईडी कार्ड से की जा सकती है, जिसमें नाम, फोटो और क्यूआर कोड होगा। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर उनकी जानकारी सत्यापित कर सकते हैं।

निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि जनगणना पूरी तरह निशुल्क है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की स्थिति में नागरिक 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।