उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एम्स की हेलि एंबुलेंस सेवा आज खुद बदहाल व्यवस्था की प्रतीक बन गई है। केदारनाथ में मई 2025 में दुर्घटनाग्रस्त हुई यह हेलि एंबुलेंस पिछले एक साल से हेलीपैड के पास क्षतिग्रस्त हालत में पड़ी है, जबकि जिम्मेदार एजेंसियां इस ओर कोई ठोस कदम उठाती नजर नहीं आ रही हैं।

17 मई 2025 को एम्स की यह हेलि एंबुलेंस एक महिला मरीज को लेने के दौरान हार्ड लैंडिंग में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से यह महत्वपूर्ण एयरो मेडिकल सेवा पूरी तरह ठप है। अनुबंध के अनुसार, दुर्घटना या खराबी की स्थिति में संबंधित कंपनी को तीन दिन के भीतर नई हेलि एंबुलेंस उपलब्ध करानी थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी न तो नई सेवा शुरू हुई और न ही क्षतिग्रस्त हेलिकॉप्टर को हटाया गया।

यह सेवा शुरुआत से ही देरी का शिकार रही। 20 सितंबर 2022 को तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसकी घोषणा की थी, जबकि 29 अक्तूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया। हालांकि, यह सेवा सात माह भी सुचारू रूप से नहीं चल पाई।

पहाड़ी क्षेत्रों, खासकर उत्तरकाशी और चमोली में इस सेवा ने कई गंभीर मरीजों और गर्भवतियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। चारधाम यात्रा के दौरान भी इसे जीवन रक्षक सेवा के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आती है।

एम्स के पीआरओ डॉ. श्रीलॉय मोहंती के अनुसार, हेलि एंबुलेंस सेवा को दोबारा शुरू करने के लिए प्रयास जारी हैं। बावजूद इसके, मौजूदा स्थिति सिस्टम की सुस्ती और आपदा प्रबंधन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।