नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नाबालिग से दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के आरोप में जेल भेजे गए युवक को पोक्सो कोर्ट ने निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट किया कि आरोपी का पीड़िता के नवजात बच्चे से कोई जैविक संबंध नहीं है, जिससे उस पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन साबित हुए।

मामला भीमताल थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2023 में 15 वर्षीय किशोरी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकीय जांच में वह गर्भवती पाई गई। कुछ समय बाद हल्द्वानी के अस्पताल में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद किशोरी ने परिजनों को बताया कि बागेश्वर निवासी एक रिश्तेदार से उसके शारीरिक संबंध बने थे, जिसके चलते वह गर्भवती हुई।

पीड़िता के बयान के आधार पर 18 मई 2023 को भीमताल पुलिस ने युवक के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर 20 मई को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपी करीब एक वर्ष तक जेल में रहा, बाद में उसे जमानत मिली।

सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश पर डीएनए जांच कराई गई। रिपोर्ट में आरोपी और बच्चे के डीएनए का मेल नहीं पाया गया। डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पोक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।

फैसले के बाद आरोपी और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली है। वहीं यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक जांच की अहम भूमिका को भी दर्शाता है।