रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन की ‘कैरी मी बैक’ पहल को श्रद्धालुओं का अच्छा समर्थन मिल रहा है। इस अभियान के तहत अब तक करीब पांच हजार श्रद्धालु केदारनाथ से वापस लौटते समय 12 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा अपने साथ नीचे ला चुके हैं। श्रद्धालुओं की इस पहल को केदारनाथ धाम और पैदल यात्रा मार्ग को स्वच्छ रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केदारनाथ धाम समुद्र तल से करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और गौरीकुंड से मंदिर तक लगभग 18 किलोमीटर का पैदल मार्ग है। ऊंचाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौती के कारण इस क्षेत्र से कचरा नीचे लाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहता है। ऐसे में ‘कैरी मी बैक’ अभियान के जरिए श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक और अन्य कचरे को अपने साथ वापस लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
अभियान के तहत श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचने के बाद अपने साथ वापस लाए जाने वाले कचरे को लेकर गौरीकुंड की ओर लौट रहे हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में यात्री प्लास्टिक की बोतलें, पैकेजिंग सामग्री, रैपर और अन्य प्लास्टिक कचरा वापस ला रहे हैं। प्रशासन की इस पहल से ऊंचाई वाले क्षेत्र में कचरे के निस्तारण की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है।
केदारनाथ यात्रा में इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सितंबर के अंत तक केदारनाथ धाम में 15.57 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। चारधाम यात्रा में भी इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है। ऐसे में बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या के बीच पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन प्रशासन के लिए अहम चुनौती बना हुआ है।
‘कैरी मी बैक’ अभियान इसी चुनौती से निपटने के साथ श्रद्धालुओं को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दे रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालु केवल धार्मिक आस्था का अनुभव लेकर न लौटें, बल्कि हिमालयी पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी अपनी भूमिका निभाएं। अब तक करीब पांच हजार श्रद्धालुओं द्वारा 12 टन से अधिक प्लास्टिक कचरा वापस लाया जाना इस अभियान की सफलता का संकेत माना जा रहा है।
