देहरादून। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने उत्तराखंड में हाल में हुए विभिन्न चुनावों की प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पंचायत, निकाय, सहकारिता और छात्रसंघ चुनावों में कथित अनियमितताओं के उदाहरण देते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में निजामुद्दीन ने हरिद्वार जिले के नारसन ब्लॉक की नाथूखेड़ी ग्राम पंचायत चुनाव का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि प्रधान पद के प्रत्याशी सुशील कुमार को शुरुआती मतगणना में 22 वोट से विजयी घोषित किया गया था, लेकिन कई बार पुनर्मतगणना के बाद अंतिम परिणाम बदल गया और उन्हें एक वोट से पराजित घोषित किया गया। इस मामले को लेकर उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण की मांग की।
उन्होंने मंगलौर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष चौधरी इस्लाम के नामांकन का मामला भी उठाया। निजामुद्दीन के अनुसार, भूमि विवाद से जुड़ी शिकायत के आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया गया, जबकि इससे पहले वह लगातार तीन चुनाव लड़ चुके थे। उन्होंने इस कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।
छात्रसंघ चुनाव को लेकर भी उठाए सवाल
काजी निजामुद्दीन ने डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विवाद और हिंसक झड़पों के बाद चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ। उन्होंने छात्र नेता विनीत भट्ट की गिरफ्तारी को लेकर भी सवाल उठाए और इसे चुनाव प्रक्रिया से जोड़कर जांच की मांग की। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
एसआईआर की अंतिम सूची से पहले पारदर्शिता की मांग
निजामुद्दीन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत तैयार मतदाता सूची को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले चुनाव अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई है और किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया गया है।
इसी मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर कुछ मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने अंतिम सूची जारी होने से पहले संबंधित मामलों की समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग की है।
