ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के आह्वान पर देशभर के बिजली कर्मचारी और अभियंता गुरुवार को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। अलग-अलग राज्यों में कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के निजीकरण संबंधी प्रस्तावों और नई नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने दावा किया कि करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता इस हड़ताल में शामिल हुए, जिससे यह स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाइयों में से एक बन सकती है।
हड़ताल का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेना तथा पावर सेक्टर में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग है। दुबे ने कहा कि बिजली क्षेत्र में बढ़ते निजीकरण से गरीब उपभोक्ताओं, छोटे और मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों को नुकसान होगा।
फेडरेशन ने आउटसोर्सिंग पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि नियमित प्रकृति के कार्यों में बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है, जिससे कर्मचारियों के अधिकारों और सेवा सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने, नियमित पदों पर सीधी भर्ती और आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण की मांग उठाई है।
इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन मिला है, जिससे आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया, तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
