देहरादून। देहरादून के हिमालयन हॉस्पिटल, जौलीग्रांट में चिकित्सा विज्ञान का एक महत्वपूर्ण करिश्मा देखने को मिला है। यहां अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित पांच वर्षीय बच्ची श्रुति का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें उसकी 18 महीने की छोटी बहन खुशी ने डोनर की भूमिका निभाई। अस्पताल का दावा है कि उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र में खुशी सबसे कम उम्र की बोन मैरो डोनर बनी है।
डॉक्टरों के अनुसार, श्रुति जन्म से ही बार-बार सर्दी, बुखार और त्वचा संक्रमण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। परिजन लंबे समय से उसकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंतित थे और बेहतर उपचार की तलाश में उसे अस्पताल लाए। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आवृत्ति बवेजा की टीम ने जांच के बाद अप्लास्टिक एनीमिया की पुष्टि की और बोन मैरो ट्रांसप्लांट को ही एकमात्र प्रभावी उपचार बताया।
हिमालयन हॉस्पिटल की विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने दोनों बहनों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच और आवश्यक तैयारी के बाद ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह जटिल प्रक्रिया सफल रही और फिलहाल दोनों बच्चियों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार, छोटे बच्चों में डोनर और रिसीवर का मेल कराना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन विशेषज्ञों की सतर्क योजना और तकनीकी दक्षता से यह संभव हो सका।
एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने इस उपलब्धि को अस्पताल की बड़ी सफलता बताते हुए मेडिकल टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि अस्पताल गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। श्रुति के माता-पिता ने चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि खुशी के डोनर बनने से उनकी बेटी को नई जिंदगी का अवसर मिला है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें खराब या रोगग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ बोन मैरो से प्रतिस्थापित किया जाता है, जिससे शरीर में रक्त कोशिकाओं का निर्माण फिर से सामान्य हो सके।
