अल्मोड़ा। अल्मोड़ा निवासी एक महिला द्वारा दायर दहेज उत्पीड़न के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पांडेय की अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए फौजी पति को निर्दोष करार दिया है। कोर्ट ने जिरह के दौरान उठे महत्वपूर्ण सवालों को आधार बनाते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को संदेहास्पद माना।

अधिवक्ता भगवती प्रसाद पंत और महेश चंद्र सिंह परिहार ने बताया कि महिला ने कुलाऊ, गरुड़ (बागेश्वर) निवासी पति एमएस परिहार के खिलाफ न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। जनवरी 2023 में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पति के खिलाफ धारा 323, 498ए, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

महिला का आरोप था कि उसका विवाह जून 2011 में हुआ था और पति आर्मी में कार्यरत था, जो उसे अपने साथ विभिन्न स्थानों पर ले गया। पहले हिसार (हरियाणा), फिर दिल्ली और बाद में हल्द्वानी में किराये के मकान में रहने लगे। दंपति के दो बच्चे भी हुए। महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही पति उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करता और मारपीट करता था।

हालांकि कोर्ट में जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि यदि महिला को विवाह के तुरंत बाद से प्रताड़ित किया जा रहा था, तो उसने 11 वर्षों तक किसी थाने या प्रशासनिक स्तर पर शिकायत क्यों दर्ज नहीं कराई। इस प्रश्न का संतोषजनक उत्तर न मिलने पर अदालत ने आरोपों को अविश्वसनीय मानते हुए फौजी पति को बरी कर दिया।

फैसले के बाद अभियोजन पक्ष की दलीलों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया गया।