रामनगर। उत्तराखंड के प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर के सुरक्षात्मक निर्माण कार्य पर डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल का असर साफ दिखाई देने लगा है। इंजीनियर्स ने मंदिर के चारों ओर चल रहे संवेदनशील निर्माण कार्य को रुकवा दिया है, जिससे स्थानीय पुजारियों और विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है।

मंदिर, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, पिछले कुछ वर्षों में बारिश और बाढ़ के कारण कमजोर हो चुके टीले पर स्थित है। मंदिर को कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर से बचाने के लिए लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से सीढ़ीनुमा सीसी ब्लॉक निर्माण कार्य किया जा रहा था। वर्तमान में नींव के लिए 20 फीट से अधिक गहरी खुदाई की जा चुकी है, लेकिन हड़ताल के चलते कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में हल्की बारिश भी खुदी हुई नींव में पानी भर सकती है, जिससे मिट्टी का कटाव बढ़ेगा और टीला कमजोर हो सकता है। मानसून नजदीक होने के कारण जोखिम और बढ़ गया है।

इस बीच, इंजीनियर्स संघ के पदाधिकारी 27 सूत्रीय मांगों को लेकर मौके पर पहुंचे और मांगें पूरी होने तक कार्य बंद रखने की बात कही।

मंदिर के पुजारी मनोज पांडेय ने इसे “अत्यंत संवेदनशील और आस्था से जुड़ा कार्य” बताते हुए हड़ताल से अलग रखने की अपील की। वहीं एसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि संबंधित विभाग से वार्ता कर जल्द कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।