फायर सीजन

हर साल फायर सीजन शुरू होते ही प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। जिस कारण वन संपदा को भारी नुकसान होता है। जिसे देखते हुए तराई पूर्वी वन प्रभाग पूरी से तरह से अलर्ट है। इस बार बारिश कम होने के कारण आगजनी की घटनाओं में बढोतरी हो सकती है। जिसको रोकने के लिए तराई पूर्वी वन प्रभाग डिवीजन ने पूरी तैयारियां कर ली है।

तराई पूर्वी डिवीजन फायर सीजन को लेकर अलर्ट

फायर सीजन को लेकर तराई पूर्वी डिवीजन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। डिवीजन को दो ब्लॉकों में बाटा गया है जिसमें फायर वॉचरों की तैनाती कर दी गई है। इसके अलावा आग पर कड़ी निगरानी रखने के लिए रेंज स्तर पर विशेष टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है। वही विभाग ने 18001804075 टोल फ्री नबंर जारी किया है। जिसपर सूचना मिलते ही विशेष टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो जाएगी।

सभी रेंजों में बनाए गए हैं क्रू स्टेशन

तराई पूर्वी वन प्रभाग डिवीजन गौला के उप प्रभागीय वनाधिकारी अनिल कुमार जोशी ने बताया कि 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन रहता है। तथा वनाग्नि को लेकर वन विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। उन्होंने कहा कि इस बार हमने विगत वर्षों से अलग तरीके से दिसम्बर और जनवरी के महीने में तैयारियां पूरी कर ली है।

उन्होंने कहा कि जिसके लिए डिवीजन की सभी रेंजों में क्रू स्टेशन बनाए गए हैं इसके साथ ही फायर वाचरों के अलावा आउटसोर्स के माध्यम से वन कर्मचारी तैनात किए हैं। क्षेत्र में आग लगने की सूचना प्राप्त होने पर क्रू स्टेशन की टीम त्वरित कार्रवाई करेंगी।उन्होंने कहा कि गोष्ठियों के माध्यम से प्रचार प्रसार किया गया है। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में निवास कर रहे लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

जन सहभागिता की ओर ज्यादा ध्यान

उप प्रभागीय वनाधिकारी ने कहा कि जन सहभागिता की ओर ज्यादा ध्यान दिया है। उन्होंने जगंलों में लगने वाली आग को लेकर जनता से सहयोग करने की अपील की है। ताकि आगजनी घटना से निपटा जा सकें। कुल मिलाकर इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए वन विभाग पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि विभाग आगजनी की घटनाओं से कैसे निपटता है और लोगों का कितना सहयोग विभाग को मिल पाता है।