दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ सियासी घमासान अब दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) तक पहुंच गया है। शुक्रवार को एमसीडी सदन की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हो गई और महापौर को बैठक 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
एमसीडी हाउस में भाजपा पार्षदों ने दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा पार्षदों का आरोप है कि विधानसभा में दिए गए एक बयान में आतिशी ने गुरु तेग बहादुर जी के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सिख समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। भाजपा पार्षद हाथों में पोस्टर लेकर नारेबाजी करते नजर आए और आतिशी की सदस्यता रद्द करने की मांग की।
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षदों ने भाजपा मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग उठाई। आप पार्षदों का कहना था कि कपिल मिश्रा धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए भुना रहे हैं और सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दोनों पक्षों की नारेबाजी के चलते सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इस बीच दिल्ली सरकार ने भी मामले में सख्त रुख अपनाया है। सरकार का आरोप है कि सदन के भीतर आतिशी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा न सिर्फ असंसदीय थी, बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भी थी।
इस संबंध में दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष को लिखित पत्र सौंपकर तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें आतिशी की विधानसभा सदस्यता तत्काल रद्द करने, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग शामिल है।
यह पत्र मंत्री प्रवेश वर्मा, पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा, मंत्री कपिल मिश्रा, मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह और मुख्य सचेतक अभय वर्मा की ओर से सौंपा गया है। विवाद के तूल पकड़ने के साथ ही राजधानी की राजनीति में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
