चमोली। उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित पिनाऊं गांव, जहां सुभाष चंद्र बोस की बटालियन के कमांडर रहे स्वतंत्रता सेनानी मेजर देव सिंह दानू का संबंध रहा है, आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। वर्ष 2015 में स्वीकृत 23 किमी लंबी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।
इस सड़क के निर्माण की घोषणा पहले वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने की थी। इसके बाद 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी इस परियोजना को लेकर घोषणा की, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क न होने के कारण उन्हें आज भी 5 से 7 किमी तक पैदल सफर करना पड़ता है। पिनाऊं गांव के साथ ही झलिया और हरमल ग्राम पंचायत के लगभग 500 लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। राशन और निर्माण सामग्री खच्चरों के जरिए ढोई जाती है, जबकि बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मेजर देव सिंह दानू के पौत्र एडवोकेट प्रेम सिंह दानू और स्थानीय निवासी विरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि सड़क न होने के कारण कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव छोड़ने को मजबूर हैं।
इस संबंध में लोनिवि थराली के अधिशासी अभियंता रमेश चंद्र ने बताया कि सड़क की फाइल वन विभाग को भेजी गई है और विभागीय प्रक्रिया जारी है। बावजूद इसके, वर्षों से लंबित यह परियोजना ग्रामीणों के लिए अब भी एक अधूरी उम्मीद बनी हुई है।
