देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी गैस आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सभी जिलाधिकारियों और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्थिति का जायजा लिया।

बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कमर्शियल गैस सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट और अन्य पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने तेल कंपनियों को निर्देश दिए कि घरेलू गैस आपूर्ति में यदि कोई बैकलॉग है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर तत्काल समाप्त किया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने जिलों में गैस आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी कालाबाजारी या कृत्रिम संकट की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने पैनिक बुकिंग जैसी प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया। साथ ही, कंपनियों को आने वाली किसी भी प्रशासनिक या लॉजिस्टिक समस्या के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए।

इस दौरान सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आनंद स्वरूप ने बताया कि राज्य में घरेलू गैस आपूर्ति में सुधार हो रहा है और पैनिक बुकिंग की घटनाओं में भी कमी आई है।

100% कोटा बरकरार रखने के साथ 5% अतिरिक्त की मांग

चारधाम यात्रा के दौरान गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से व्यावसायिक एलपीजी का 100 प्रतिशत आवंटन बरकरार रखने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही संभावित आपदा स्थितियों के मद्देनजर 5 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा भी मांगा गया है। अनुमान के अनुसार, यात्रा अवधि में राज्य को करीब 9.67 लाख व्यावसायिक सिलेंडरों के साथ लगभग 48 हजार अतिरिक्त सिलेंडरों की आवश्यकता होगी।

प्रवर्तन अभियान तेज, अनियमितताओं पर कार्रवाई

एलपीजी आपूर्ति को पारदर्शी बनाए रखने के लिए राज्यभर में प्रवर्तन अभियान भी तेज किया गया है। 9 मार्च 2026 से चल रहे अभियान के तहत अब तक 5934 निरीक्षण किए जा चुके हैं। इस दौरान 864 घरेलू और 168 व्यावसायिक सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा 362 छापे मारे गए, 17 एफआईआर दर्ज हुईं और 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

प्रवर्तन टीमों ने अवैध रिफिलिंग और गैस के दुरुपयोग से जुड़े उपकरण भी जब्त किए हैं। साथ ही अब तक कुल 1.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी और गैस आपूर्ति व्यवस्था को हर हाल में दुरुस्त रखा जाएगा।