देहरादून। उत्तराखंड में सोमवार से टोल प्लाजा पार करने वाले वाहनों की अब डिजिटल निगरानी की जाएगी। यदि कोई वाहन बिना पूरे वैध दस्तावेजों के टोल पार करता है, तो उसका तुरंत ऑटोमेटेड चालान कट जाएगा। राज्य के सात टोल प्लाजा पर ई-डिटेक्शन प्रणाली शुरू की जा रही है, जिससे परिवहन नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई संभव होगी।

इस नई प्रणाली के तहत जैसे ही वाहन का फास्टैग स्कैन होकर टोल शुल्क कटेगा, उसी समय वाहन नंबर के आधार पर ऑनलाइन रिकॉर्ड जांचा जाएगा। इसमें परमिट, पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण प्रमाणपत्र, बीमा और रोड टैक्स से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सत्यापित किया जाएगा। यदि किसी आवश्यक दस्तावेज में कमी पाई जाती है, तो वाहन मालिक के नाम पर स्वतः चालान जारी हो जाएगा।

परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी ने बताया कि पिछले सप्ताह दिल्ली में आयोजित परिवहन विकास परिषद की बैठक में इस प्रणाली को अपनाने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात के बाद उत्तराखंड यह प्रणाली लागू करने वाला देश का पांचवां राज्य बन गया है।

परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से इस स्वचालित प्रणाली को विकसित किया है। पहले चरण में यह व्यवस्था देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंहनगर जिलों के सात टोल प्लाजा पर लागू की जा रही है।

प्रारंभिक चरण में तीन मामलों में ऑटोमेटेड चालान काटे जाएंगे — बिना वैध परमिट, बिना बीमा और बिना फिटनेस प्रमाणपत्र वाले वाहन। इसके अलावा 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों की भी पहचान की जाएगी, जिनका पंजीकरण समाप्त हो चुका है।

इस पहल से सड़क सुरक्षा बढ़ाने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।