काशीपुर। बीते दिनों इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत और सैकड़ों के बीमार होने की घटनाओं के बाद काशीपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। शहर के आठ से अधिक मोहल्लों में दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें लगातार जल संस्थान को मिल रही हैं। दशकों पुरानी पेयजल पाइप लाइनों में बार-बार लीकेज और क्षति के कारण नलों से गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है।
शहरी क्षेत्र में करीब पांच दशक पहले जल आपूर्ति के लिए लगभग 46 किलोमीटर लंबी पाइप लाइनें बिछाई गई थीं। इन्हीं लाइनों से आज भी अधिकांश उपभोक्ताओं के घरों में पानी की आपूर्ति हो रही है।
बीते चार वर्षों में अमृत योजना के तहत करीब 16 किलोमीटर नई पाइप लाइनें जरूर बिछाई गई हैं, लेकिन अब भी शहर में लगभग 30 किलोमीटर पुरानी लाइनें मौजूद हैं। इन इलाकों में आए दिन पाइप लाइन लीकेज, टूट-फूट और गंदे पानी के मिल जाने की समस्या बनी रहती है। इससे एक ओर पानी की भारी बर्बादी हो रही है, वहीं दूसरी ओर दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं।
जल संस्थान के अनुसार इन क्षेत्रों से हर महीने 50 से 60 शिकायतें ऑनलाइन और ऑफलाइन दर्ज हो रही हैं, जिनमें दो से तीन शिकायतें सीधे दूषित पानी से जुड़ी होती हैं। काजीबाग, कटोराताल, किला, बांसफोड़ान, औझान, महेशपुरा, लाहोरियान और खत्रियान जैसे इलाकों में पांच दशक पुरानी पाइप लाइनें बिछी हैं, जहां यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है।
सरकारी अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ. अमरजीत सिंह साहनी के अनुसार दूषित पानी पीने से डायरिया, पीलिया, डिसेंट्री, टाइफाइड और पेशाब में संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। ओपीडी में आने वाले करीब 30 प्रतिशत मरीज पेट संबंधी रोगों से पीड़ित हैं, जिनमें अधिकांश इन्हीं क्षेत्रों से हैं। उन्होंने लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी है।
वहीं जल संस्थान के सहायक अभियंता नरेंद्र सिंह रिखाड़ी का कहना है कि शिकायतें मिलने पर समय से निस्तारण किया जाता है, लेकिन पुरानी पाइप लाइनों के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है। यदि जल्द ही व्यापक स्तर पर पाइप लाइनों को बदला नहीं गया, तो यह स्थिति भविष्य में बड़े खतरे का रूप ले सकती है।
