देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज रावत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की।
मनोज रावत का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए, जो लंबे समय से अपने क्षेत्रों में रह रहे हैं और लगातार मतदान करते आए हैं। कांग्रेस पहले भी एसआईआर के दौरान फर्जी या संदिग्ध आपत्तियों के माध्यम से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगा चुकी है।
उत्तराखंड में एसआईआर के तहत मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। जुलाई में जारी ड्राफ्ट सूची में करीब 8.26 लाख नाम हटाए गए थे। इनमें मृतक, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दोहरे मतदाताओं की श्रेणी में आने वाले नाम शामिल थे। वहीं, बड़ी संख्या में मतदाताओं के दस्तावेजों और विवरण में विसंगतियां भी सामने आई थीं।
अब अंतिम मतदाता सूची भी जारी हो चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार, एसआईआर के बाद उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 71.6 लाख रह गई है, जो पुनरीक्षण से पहले की संख्या की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम है। देहरादून और ऊधमसिंह नगर में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
मनोज रावत ने चुनाव आयोग से मांग की है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनकी सूची और प्रक्रिया की पारदर्शी तरीके से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार केवल प्रक्रिया संबंधी खामी के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पात्र लोगों को दोबारा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की सुविधा दी गई है।
