देहरादून। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए अब स्कूलों के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेशभर में 780 से अधिक शिक्षकों को सड़क सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित किया जाएगा। ये शिक्षक विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और समुदाय के लोगों तक भी सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाएंगे। अभियान का उद्देश्य बच्चों में सुरक्षित यातायात व्यवहार विकसित करना और सड़क दुर्घटनाओं को कम करना है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की ओर से संचालित ‘सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा’ जनजागरूकता अभियान 2026-27 के तहत यह पहल की जा रही है। अभियान में सड़क सुरक्षा को केवल यातायात नियमों की जानकारी तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों में व्यवहार परिवर्तन पर भी जोर दिया जाएगा। हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल, निर्धारित गति सीमा का पालन, जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग और सड़क पर जिम्मेदारी से चलने जैसी आदतों को बढ़ावा दिया जाएगा।

अभियान के तहत 52 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे, जो आगे 780 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद इन शिक्षकों के माध्यम से करीब 78 हजार विद्यार्थियों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। स्कूलों में सड़क सुरक्षा क्लब और रोड सेफ्टी कॉर्नर विकसित करने की भी योजना है। इन कॉर्नर में यातायात संकेतों, हेलमेट, प्राथमिक उपचार और सड़क सुरक्षा से जुड़ी अन्य उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

विद्यालयों में निबंध, पोस्टर, क्विज, वाद-विवाद और नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को होने वाले बैगलेस डे पर सड़क सुरक्षा से संबंधित विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसमें पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा।

SCERT की इस पहल का उद्देश्य स्कूलों से निकलकर सड़क सुरक्षा के संदेश को परिवार और समाज तक पहुंचाना है। अधिकारियों का मानना है कि बच्चों को कम उम्र से ही सुरक्षित यातायात व्यवहार की जानकारी देने से वे स्वयं भी नियमों का पालन करेंगे और अपने अभिभावकों को भी इसके लिए प्रेरित कर सकेंगे। परिवहन विभाग भी प्रदेश में सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए विभिन्न अभियान और कार्यक्रम चला रहा है।

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