किच्छा (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र में बाल विवाह का एक मामला सामने आने पर प्रशासन और सामाजिक संगठनों में हड़कंप मच गया। अंजनिया गांव में सोमवार रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब शादी समारोह के बीच पुलिस और एक एनजीओ की टीम ने मौके पर पहुंचकर विवाह को रुकवा दिया।

जानकारी के अनुसार, 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी की शादी 27 वर्षीय युवक से कराई जा रही थी। शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और बारात भी गांव पहुंच गई थी। इसी दौरान एक एनजीओ को बाल विवाह की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस और एनजीओ टीम ने लड़की की उम्र से संबंधित दस्तावेज मांगे, लेकिन परिजनों ने दस्तावेज दिखाने में आनाकानी की।

जब अधिकारियों ने स्कूल रिकॉर्ड की जांच की तो किशोरी के नाबालिग होने की पुष्टि हो गई। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए शादी की रस्में रुकवा दीं और बारात को वापस लौटा दिया। साथ ही किशोरी को सुरक्षित कस्टडी में लेकर बाल संरक्षण अधिकारियों के हवाले कर दिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत नाबालिग की शादी कराना दंडनीय अपराध है।

प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा से दूर रहें और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग करें। इस घटना के बाद इलाके में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की भी तैयारी की जा रही है।