नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत इस सप्ताह के अंत में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। आगामी शनिवार को राजधानी दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक आयोजित होगी, जिसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। यह बैठक खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि यह दस वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है और पहली बार भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, कूटनीतिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इसी बीच, घरेलू राजनीति में कांग्रेस सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच चल रहे मतभेद भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। बीते कुछ महीनों से दोनों के बीच तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब थरूर पार्टी की एक अहम बैठक में शामिल नहीं हुए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे एक साहित्य उत्सव में थे और इसकी सूचना नेतृत्व को पहले ही दे दी गई थी।
तनाव तब और बढ़ गया जब थरूर ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकट प्रबंधन की सराहना की। इस पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जताई। इसके बाद भाजपा ने उन्हें एक अंतरदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौंपा, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस का कोई अन्य नेता शामिल नहीं था, जिससे उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं।
इसके अतिरिक्त, थरूर द्वारा वंशवादी राजनीति की आलोचना वाला लेख और प्रधानमंत्री के भाषण की प्रशंसा भी कांग्रेस नेतृत्व को असहज कर गई। हालांकि, थरूर ने बार-बार कहा कि उनकी टिप्पणियां राजनीतिक रणनीति नहीं बल्कि राष्ट्रहित से प्रेरित हैं।
हाल ही में राहुल गांधी से हुई मुलाकात के बाद संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद अब सुलझ सकते हैं।
